सोमवार, 8 मार्च 2010

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रविवार, 28 फ़रवरी 2010

शुक्रवार, 8 जनवरी 2010

एडवांसेज इन सेपरेशन टेक्नोलाॅजी विषय पर सिंपोजियम संपन्न

तकनीकी ज्ञान का परस्पर आदान-प्रदान अधिक से अधिक हो देहरादून 09 जनवरी, 2010। भारतीय पेट्रोलियम संस्थान (आईआईपी) में एडवांसेज इन सेपरेशन टेक्नोलाजी विषय पर चल रहे सिंपोजियम का शुक्रवार को समापन हो गया। इस कार्यषाला में आये विषेषज्ञों ने सेपरेशन टेक्नोलाजी के क्षेत्र में हुई अब तक की प्रगति पर प्रकाश डाला। विषेषज्ञों ने कहा कि प्रौद्योगिकी विकास के लिए तकनीकी ज्ञान का परस्पर आदान-प्रदान अधिक से अधिक होना चाहिए। संस्थान के निदेशक डा. एम.आ.े गर्ग ने गैसोलीन और डीजल से जुड़े पहलुओं पर प्रकाश डाला। साथ ही आईआईपी में एसआईएनटीईएफ नार्वे के साथ किए जा रहे सहयोगात्मक कार्यों की संक्षिप्त जानकारी दी। उन्होंने श्रोताओं को एनटीपीसी दिल्ली और आईआईटी मुंबई के साथ कार्बन-डाई-आक्साइड कैप्चर पर संयुक्त रूप से किए गए कार्य के बारे में भी जानकारी दी। दूसरे सत्र में कार्बन-डाई-आक्साइड के अवशोषण के लिए धातु कार्बन ढांचे के अनुप्रयोग और ऊर्जा संरक्षण के लिए झिल्लियों, निष्कर्षण आदि पर हुई प्रगति पर बात की गई। वातावरण में कार्बन-डाई-आक्साइड के उत्सर्जन को कम करने पर चर्चा हुई। गौरतलब है कि इस दो दिवसीय सिंपोजियम में विभिन्न विषयों पर कुल पांच तकनीकी सत्र आयोजित किए गए थे। इस दौरान एसआईएनटीईएफ नार्वे की एलिजाबेथ टंगस्टैड, रिचर्ड 4लाम, डा. राकेश अग्रवाल, डा. झूमा, प्रो. वीजी गायकर, जेएनयू नई दिल्ली की डा. मालती गोयल, आईआईटी रुड़की के प्रो. आईएम मिश्र आदि उपस्थित थे।

3 करोड़ रुपये की लागत से बने बायोटैक्नोलाॅजी भवन का लोकार्पण


नैनीताल 09 जनवरी, 2010 उत्तराखण्ड के मुख्यमंत्री डा. रमेश पोखरियाल निशंक ने पंतनगर में 3 करोड़ रूपये की लागत से बायोटैक्नोलाॅजी भवन तथा रूद्रपुर में 1.9 करोड़ की लागत से बने औषधि एवं खाद्य प्रयोगशाला का लोकार्पण किया। उन्होंने कहा कि जैव प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में सबसे अधिक काम उत्तराखण्ड की धरती पर हो सकता है। इसके लिए हम सबकों मिलकर प्रयास करने होंगे। उत्तराखण्ड को टिश्यू कल्चर के क्षेत्र में भी आगे बढ़ाने के लिये पूरी कोशिश की जायेगी। उत्तराखण्ड राज्य को शिक्षा, हरित, ऊर्जा, पर्यटन व जैव विविधता के क्षेत्र में अग्रणी बनाना सरकार का मुख्य लक्ष्य है। हमारे पास अपार प्राकृतिक सम्पदा है, जिसका उचित दोहन कर प्रदेष को आर्थिक रूप से सम्पन्न बनाया जा सकता है। बायोटैक्नोलाजी प्रयोगशाला पर्वतीय क्षेत्रों में पायी जाने वाले विशिष्ट एवं अमूल्य प्रजातियों के संरक्षण मंे मददगार साबित होगी। बायोटैक्नोलाॅजी के विकास से रोजगार के नये अवसर पैदा होंगे तथा प्रदेश के उद्योगों को लाभ होगा। डा. निशंक ने कहा कि औषधि एवं खाद्य प्रयोगशाला में औषधि एवं खाद्य पदार्थों में मिलावट का पता लगाया जा सकेगा। इसकी स्थापना से उपभोक्ताओं को शुद्ध एवं उच्च गुणवत्ता के खाद्य पदार्थ एवं औषधियां मिल सकेंगी। बायोटैक्नोलाॅजी परियोजना के निदेशक एवं वैज्ञानिक सलाहकार राजेन्द्र डोभाल ने बताया कि बायोटैक्नोलाॅजी भवन में नैनो टैक्नोलाॅजी, डीएनए मार्किंग पर बौद्धिक अधिकार (पेटेण्ट) आदि पर कार्य होगा। उन्होंने बताया कि भवन में लगभग 40 लाख के अत्याधुनिक उपकरण स्थापित किए गये हैं।

रविवार, 20 दिसंबर 2009

संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2010 को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष घोषित

देहरादून 20 दिसम्बर, 2009। संयुक्त राष्ट्र संघ द्वारा वर्ष 2010 को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष घोषित किया गया है। वर्ष 2010 को अंतर्राष्ट्रीय जैव विविधता वर्ष के रूप में मनाने के लिए भारत में राष्ट्रीय जैव विविधता प्राधिकरण ने तैयारियां शुरू कर दी है। इसके तहत जैव विविधता के महत्व, संरक्षण एवं इनके प्रभावों के संबंध में जनता को जागरूक किया जायेगा। इसके साथ ही सरकारी संस्थाओं एवं समुदायिक स्तर पर जैव विविधता के संरक्षण पर कार्य करने वाले लोगों एवं संस्थाओं को सम्मानित किया जायेगा, साथ ही जैव विविधता के लिए उत्पन्न होने वाले खतरे को कम करने के लिए नवीन शोधों और अनुसंधानों को बढ़ावा दिया जायेगा। भारत सरकार ने इस संबंध में एक उच्च स्तरीय समिति का गठन कर दिया है, जो 2010 में वर्ष भर चलने वाले जैव विविधता कार्यक्रमों की रूपरेखा तय करेगी।

शुक्रवार, 18 दिसंबर 2009

जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की संधि का पालन हो


प्रधानमंत्री ने पुरानी मांगें दोहराईं

मनमोहन सिंह
मनमोहन सिंह ने कोपेनहेगन से रवाना होने से पहले भी यही बातें कही थीं
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने कोपेनहेगन के जलवायु परिवर्तन सम्मेलन में भारत की पुरानी मांगें दोहराते हुए कहा है कि जलवायु परिवर्तन के लिए जो दोषी नहीं हैं, उन्हें उसकी सज़ा नहीं मिलनी चाहिए.
उन्होंने कहा कि एक तो संयुक्त राष्ट्र के क़ायदों के अनुरुप समझौता होना चाहिए और दूसरे बाली में बनी सहमति को अनदेखा नहीं करना चाहिए.
बाली में बनी सहमति के अनुसार जलवायु परिवर्तन रोकने के लिए ज़िम्मेदारियाँ देशों की क्षमताओं के अनुरुप तय होनी चाहिए.
उन्होंने अपने भाषण में कहा कि जलवायु परिवर्तन को लेकर तीन सबक सीखने को मिले हैं.
पहले सबक का ज़िक्र करते हुए उन्होंने कहा, "रियो सम्मेलन या क्योटो संधि के समय हमारे सामने कार्रवाई की जो योजना रखी गई थी वह इस समय बहुत नहीं बदली है. इसीलिए हमें बाली कार्ययोजना पर अमल करना चाहिए जिससे कि जलवायु परिवर्तन पर संयुक्त राष्ट्र की संधि का पालन कर सकें."
उन्होंने कहा कि इस सम्मेलन में जो भी तय हो वह बाली कार्य योजना के तहत ही तय होना चाहिए.
इस सम्मेलन का चाहे जो भी परिणाम निकले भारत ने अपने लिए कुछ लक्ष्य तय कर लिए हैं और वह इनका पालन करता रहेगा
मनमोहन सिंह
दूसरे सबक के रुप में उन्होंने कहा कि क्योंटो संधि की क़ानूनी बाध्यता को बरकरार रखना चाहिए.
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह ने विश्व नेताओं को चेतावनी दी कि कोपेनहेगन में ऐसी किसी सहमति को मंज़ूरी नहीं दी जानी चाहिए जिससे कि क्योटो संधि की प्रासंगिकता पर आँच आए.
तीसरे सबक के रुप में उन्होंने कहा कि विकासशील देशों को विकसित देशों के साथ बोझ साझा करना चाहिए. उन्होंने कहा कि विकास पर विकासशील देशों का भी बराबरी का हक़ है.
मनमोहन सिंह ने कहा, "इस सम्मेलन का चाहे जो भी परिणाम निकले भारत ने अपने लिए कुछ लक्ष्य तय कर लिए हैं और वह इनका पालन करता रहेगा."
उन्होंने विश्व नेताओं को बताया कि वर्ष 2020 तक भारत अपने कार्बन उत्सर्जन में वर्ष 2005 की तुलना में 20 प्रतिशत तक की कटौती कर लेगा.
उन्होंने कहा कि भारत ने वर्ष 2022 तक सौर ऊर्जा से 20 हज़ार मेगावाट बिजली के उत्पादन का लक्ष्य रखा है और यह फ़ैसला किया है कि वर्ष 2020 तक ऊर्जा क्षमताओं में 20 प्रतिशत तक की बढ़ोत्तरी करेगा.
उनका कहना था कि भारत अगले कुछ वर्षों में अपने जंगलों में 60 लाख हेक्टेयर का इज़ाफ़ा करेगा.
प्रधानमंत्री सिंह ने विश्व नेताओं से अपील की है कि वे सुनिश्चित करें कि विकासशील देशों के साथ कोई अन्याय न हो